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हिन्दी विभाग


हिन्दी विभाग : एक नजर में                विभाग में कार्यरत अध्यापकः                  पाठ्यक्रम                   एलवम

 

स्नातकोत्तर हिन्दी(एम. ए.)

प्रथम अध्ययन सत्र

पाठयक्रम 01

 1. प्राचीन एवं मध्यकालीन निर्गुण काव्य

2. हिन्दी साहित्य का इतिहास

3. आधुनिक गद्य

4. भाषा विज्ञान एवं हिन्दी भाषा

5. आधुनिक काव्य

6. भारतीय काव्यशास्त्र

पाठयक्रम प्रतिफल

1. प्रश्न पत्र प्रथम में विद्यार्थी प्राचीन एवं मघ्यकालीन निर्गुण काव्य का अध्ययन करेंगे। इस प्रश्नपत्र में उस युग की प्रतिनिधि रचनाओं का अध्ययन किया जायेगा। साथ ही द्वितीय प्रश्नपत्र आदिकाल से लेकर रीतिकालीन हिन्दी साहित्य के इतिहास की विस्तृत जानकारी छात्र-छात्राओं को देगा। जो हिन्दी साहित्य के अध्ययन में आधार-सामग्री का कार्य करेगा।

2. तृतीय प्रश्नपत्र के माध्यम से छात्र-छात्राएँ गद्य लेखन की प्रतिनिधि रचनाओं-स्कंदगुप्त, आधे-अधूरे, निबंध (संकलन) तथा प्रतिनिधि गद्य रचयिताओं के विषय में जानकारी प्राप्त करेंगे। चतुर्थ प्रश्नपत्र भाषा विज्ञान के सैद्धांतिक पक्ष के परिज्ञान के साथ-साथ हिन्दी भाषा वैज्ञानिक अध्ययन की जानकारी देगा।

3. पंचम् प्रश्नपत्र आधुनिक युग के प्रतिनिधि काव्य-रचयिताओं-कामायनी, राम की शक्ति पूजा, अनामिका, नये पत्ते, पल्लव, चिदंबरा, उर्वशी, साकेत, उद्धव-शतक आदि का भावबोध छात्र-छात्राओं को करायेगा। छठा प्रश्नपत्र साहित्य के निर्माण में किन-किन बारीकियों का ध्यान रखा जाता है, इस तथ्य से अवगत करायेगा। इस प्रश्नपत्र में भारतीय काव्यशास्त्रियों के विचार एवं सिद्धांतां (रस, अलंकार, रीति, वक्रोक्ति, ध्वनि तथा औचित्य) का अनुशीलन किया जायेगा।

कार्यक्रम प्रभाव

1. प्रथम अध्ययन सत्र के अवगाहन से छात्र-छात्राओं में भारतीय साहित्य के विविध भाषा-साहित्य के कवियों को समझने में सहायता होगी तथा वे एक वैचारिक समरसता को रेखांकित करने में समर्थ होंगे।

2. आधुनिक युग ‘गद्य’ के नाम से जाना जाता है। वर्तमान समय की जटिलताओं को तार्किक एवं विश्लेषणात्मक दृष्टि से समझने का भावबोध यह साहित्य करता है।

3. आलोच्य पाठयक्रम में संस्कृति, परंपरा, भाषा, रीति-रिवाज, शहरीकरण तथा शहरी संस्कृति, क्षेत्रीय लोक संस्कृति, लोकभाषा, सामाजिक असमानता तथा जेंडर, सांस्कृतिक विरासत और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को सम्मिलित किया गया है।

 द्वितीय अध्ययन सत्र

पाठयक्रम 02

1. मध्यकालीन सगुण एवं रीतिकालीन काव्य

2. हिन्दी साहित्य का इतिहास 3. कथा-साहित्य

4. भाषा विज्ञान एवं हिन्दी भाषा

5. छायावादोत्तर काव्य

6. पाश्चात्य काव्यशास्त्र

पाठयक्रम प्रतिफल

1. प्रथम एवं द्वितीय प्रश्नपत्र के माध्यम से छात्र-छात्राएँ मध्यकालीन एवं रीतिकालीन युग की भावभूमि एवं बोध को समझते हुए उस समय की प्रतिनिधि साहित्यकारों के काव्य का अवगाहन करेंगे। द्वितीय प्रश्नपत्र हिन्दी भाषा-साहित्य के आधुनिक युग की विस्तारपूर्वक जानकारी देता है। इस युग में गद्य की नवीन प्रवृत्तियाँ उद्भूत हुई हैं। उनके अध्ययन से छात्रों में नव-विचारधाराओं-मनोविश्लेषण, मार्क्सवाद, अस्तित्ववाद, उत्तर आधुनिकता, नव संरचनावाद, विखण्डन आदि को जानने की इच्छा होती है। तृतीय प्रश्न पत्र शेखर : एक जीवनी, बाणभट्ट की आत्मकथा, कहानी-संग्रह के साथ-साथ यशपाल, भीष्म साहनी, अमरकांत, मन्नू भंडारी, बच्चन आदि की रचनाओं से भी साक्षात्कार कराता है। चतुर्थ प्रश्न पत्र हिन्दी भाषा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि-वैदिकी, छांद्स, संस्कृत, पालि, प्राकृत, ब्रज, अवधी तथा हिन्दी के विविध रूपों की जानकारी देता है। पांचवा प्रश्न पत्र छायावादोत्तर कवियों के काव्य से परिचित कराता है तथा क्रमशः छठा प्रश्न पत्र पाश्चात्य काव्यशास्त्रियों-प्लेटो, अरस्तू, वर्ड्सवर्थ, रिचर्डस, इलियट आदि के काव्य-विचारों से सिद्धांतों से अवगत कराता है।

कार्यक्रम प्रभाव

 1. प्रस्तुत पाठयक्रम छात्र-छात्राओं में तार्किक तथा विश्लेषणात्मक प्रकृति का विकास करता है। साथ ही आलोचनात्मक अथवा समीक्षात्मकदृष्टि को विकसित करता है।

 2. यह पाठ्यक्रम लोकतांत्रिक मूल्यों, गांधीवादी विचारों, संवेदनशीलता, परदुखकातरता, मानवतावादी विचारधारा, गणतंत्र, समानता तथा प्रजातंत्र की प्रकृति को विकसित करता है।

3. वैश्विक स्तर पर यह पाठ्यक्रम मध्ययुगीन एवं आधुनिक साहित्य की केन्द्रीय संवेदना को समझने में सहायक सिद्ध होता है। साथ ही विश्व की विविध भाषाओं को जानने तथा समझने की प्रकृति भी यह पाठ्यक्रम विकसित करता है।

तृतीय अध्ययन सत्र

पाठयक्रम 03

1. हिन्दी आलोचना साहित्य

2. प्रयोजनमूलक हिन्दी

3. भारतीय साहित्य

4. सूरदास/तुलसीदास/लोक साहित्य

5. हिन्दी उपन्यास/नाटक एवं रंगमंच

6. दृश्य एवं श्रव्य माध्यम लेखन/राजभाषा प्रशिक्षण/छायावादी काव्य

पाठ्यक्रम प्रतिफल

1. प्रथम प्रश्न पत्र छात्र-छात्राओं को समीक्षा के विविध पक्षों की जानकारी देता है। वहीं द्वितीय प्रश्न पत्र प्रयोजनमूलक हिन्दी के विविध रूपों राजभाषा, राष्ट्रभाषा, कम्प्यूटर, इण्टरनेट आदि को समझने में सहायता करता है।

2. तृतीय प्रश्न पत्र भारतीय साहित्य के स्वरूप, उसके प्रतिनिधि रचनाकार, कृतियाँ तथा विविध भारतीय भाषाओं के साहित्य एवं भाषा पर प्रकाश डालता है। चतुर्थ प्रश्न पत्र हिन्दी के शीर्ष कवियों-सूरदास, तुलसीदास अथवा लोकसाहित्य के गहन अध्ययन का परिज्ञान कराता है।

3. पंचम् प्रश्न पत्र-हिन्दी उपन्यास/नाटक और रंगमंच के अध्ययन को प्रस्तुत करता है। प्रेमचन्द, वृंदावनलाल वर्मा, जैनेन्द्र कुमार, मनोहरश्याम जोशी के उपन्यास के द्वारा समाज एवं जीवन को समझने का प्रयास यह प्रश्न पत्र करता है।

कार्यक्रम प्रभाव

1. प्रस्तुत पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को समकालीन चुनौतियों, जटिलताओं, समस्याओं, मुद्दों से अवगत कराता है। उन्हें देश की ज्वलंत समस्याओं-भाषावाद, छुआछूत, सांप्रदायिकता, मानव-तस्करी, आतंकवाद आदि से अवगत कराता है। वे साहित्य के अध्ययन के माध्यम से तार्किक एवं विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के द्वारा इन्हें समझें तथा निराकरण का प्रयास करते हुए देखे जा सकते हैं।

2. छात्र-छात्राओं को सामाजिक सरोकारों से अवगत कराना प्रस्तुत पाठ्यक्रम का लक्ष्य है। छा़त्र-छात्राओं में जनजागरण की प्रवृत्ति को विकसित करना भी एवं अन्य तथ्य यहाँ प्रतिध्वनित होता है। बेरोज़गारी, छुआछूत, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण के प्रति लोकजागरण उत्पन्न करना तथा संवेदना को मानवीय भावभूमि पर जागृत करना भी प्रस्तुत पाठ्यक्रम का लक्ष्य है।

 चतुर्थ अध्ययन सत्र

पाठ्यक्रम 04

 1. बंगला साहित्य एवं हिन्दी भाषा का तुलनात्मक अध्ययन

 2. प्रयोजनमूलक हिन्दी (मीडिया लेखन एवं अनुवाद सिद्धांत एवं व्यवहार)

3. हिमालयी साहित्य एवं संस्कृति

4. गढ़वाली लोकसाहित्य

 5. संस्कृत/पालि/जनपदीय भाषा साहित्य

6. जयशंकर प्रसाद/सुमित्रानंदन पंत/चंद्रकुँवर बर्त्वाल

पाठ्यक्रम प्रतिफल

1. प्रथम प्रश्न पत्र बंगला भाषा एवं हिन्दी भाषा के भाषा-साहित्य का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। वहीं द्वितीय प्रश्न पत्र मीडिया एवं अनुवादःसिद्धांत एवं व्यवहार पर रोशनी डालता है।

2. तृतीय प्रश्न पत्र हिमालय की संस्कृति एवं पहचान तथा जातीय अस्मिता को रेखांकित करता है। वहीं चतुर्थ प्रश्न पत्र गढ़वाली लोक साहित्य की लोकसंस्कृति, लोकजीवन तथा लोकपरंपरा को उजागर करता है।

3. पंचम् प्रश्न पत्र अभिजात्य भाषाओं-संस्कृत तथा पालि के अनुशीलन के साथ-साथ जनपदीय भाषा (गढ़वाली-कुमाउनी) के अध्ययन पर बल देता है छठा प्रश्न पत्र प्रसाद, पंत अथवा चंद्रकुँवर बर्त्वाल के विशेष अध्ययन को रेखांकित करता है।

कार्यक्रम प्रभाव

भाषा-साहित्य एवं संस्कृति की विविध संकल्पनाओं की समझ की आवश्यकता तथा इनके अन्तर्संबंधों के महत्व को प्रत्येक छात्र-छात्राओं को समझाना उपर्युक्त पाठ्यक्रम का लक्ष्य है। आलोच्य पाठ्यक्रम में संस्कृति, परंपरा, भाषा, रीति-रिवाज, शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रीय लोक-संस्कृति, लोकभाषा, राजभांषा, राष्ट्रभाषा, सामाजिक असमानता, जेंडर, वनजीवी, स्त्री, दलित, पिछड़ा-वर्ग, सांस्कृतिक विरासत और संस्कृति रूप तथा सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को सम्मिलित किया गया है। जिसके फलस्वरूप विद्यार्थियों की जीवन-शैली, विचार-दृष्टि अथवा योग्यता तार्किक, वृहत भावभूमि और प्रजातांत्रिक मूल्यों पर विकसित होगी। फलतः वे किसी भी परियोजना/कार्य-योजना को निरंतरता, तत्कालीन परिस्थितियों, कालक्रम और समय-परिवर्तन को ध्यान में रखकर परिचालित करने में समर्थ हो सकेंगे।

 

 

 स्नातक हिन्दी (बी.ए.)

प्रथम अध्ययन सत्र

पाठ्यक्रम -01

 1. हिन्दी साहित्य का इतिहास

2. हिन्दी भाषा और साहित्य

3. हिन्दी गद्य का उदभव एवं विकास

पाठ्यक्रम प्रतिफल

1. प्रथम प्रश्न पत्र हिन्दी भाषा एवं उसके इतिहास से छात्रों को परिचित करता है।

 2. द्वितीय प्रश्न पत्र हिन्दी भाषा एवं आर्य भाषा परिवार की विविध बोलियों एवं उभभाषाओं की जानकारी देने के साथ-साथ विद्यार्थिंयों को प्राचीन, मध्यकालीन तथा आधुनिक हिन्दी साहित्य की विविध विधाओं एवं साहित्यकारों के लेखन से अवगत कराता है।

3. तृतीय प्रश्न पत्र आधुनिक हिन्दी गद्य के विविध रूपां-कहानी, यात्रा-वृत्तांत, संस्मरण आदि की प्रतिनिधि रचनाओं से छात्रों को अवगत कराता है।

कार्यक्रम प्रभाव

1. पाठ्यक्रम के अध्ययन के उपरांत छात्र-छात्राओं में परंपरागत दर्शन, मूल्यों, संस्कार, परंपरा, आचार एवं संवेदनशीलता का भाव त्वरित गति से जाग्रत होगा।

2. हिन्दी भाषा एवं साहित्य के परिप्रेक्ष्य में अन्य भारतीय भाषाओं के साहित्य एवं साहित्यकारों के प्रति अध्ययन एवं अधिगम की प्रवृत्ति जाग्रत होगी।

द्वितीय अध्ययन सत्र

पाठ्यक्रम -02

1. मध्यकालीन कविता

2. हिन्दी भाषा और संप्रेषण

3. हिन्दी का व्यावहारिक व्याकरण शास्त्र

पाठ्यक्रम प्रतिफल

1. मध्यकालीन चेतना एवं इतिहास के परिप्रेक्ष्य में अध्ययन एवं अनुशीलन से विद्यार्थिंयों के अन्तरमन् में वर्तमान मानवीय मूल्यों को समझने से सुविधा होगी।

2. हिन्दी साहित्य के प्रतिनिधि आधार साहित्यकारों के साहित्य से विद्यार्थी अवगत् होंगे जिनमें-कबीर, तुलसी, सूरदास, मीराबाई, केशवदास आदि प्रमुख हैं।

3. हिन्दी भाषा एवं संप्रेषण प्रश्न पत्र के द्वारा छात्रों में संप्रेषण से संबद्ध विविध पक्षों को समझने और भाषा-सम्प्रेषण के विविध आयामों को हृदयंगम करने में सुविधा होगी।

 4. उक्त पाठ्यक्रम के द्वारा छात्र-छात्राएँ भाषा के सैद्धांतिक पक्षों, उसके व्याकरण, शब्द-भण्डार, वाक्य एवं वर्तनी इत्यादि की अशुद्धियों से अवगत होंगे।

कार्यक्रम प्रभाव

1. उक्त पाठ्यक्रम के द्वारा विद्यार्थियों में मध्यकालीन साहित्य के साथ भारतीय भाषाओं के अन्य कवि एवं उनके साहित्य के प्रति अभिरुचि उत्पन्न होगी।

2. भाषा-कौशल एवं वर्तनी की अशुद्धियों तथा भाषा-संस्कार के प्रति विद्यार्थियों की जिज्ञासा बढ़ेगी जिसके द्वारा वाङ्मय के वृहत्तर स्तर पर उनके अवगाहन पर प्रभाव पड़ेगा।

 तृतीय अध्ययन सत्र

पाठ्यक्रम- 03

1. आधुनिक हिन्दी कविता

2. कार्यालयी हिन्दी

पाठ्यक्रम प्रतिफल

1. हिन्दी भाषा-साहित्य के अध्येताओं को उपर्युक्त पाठ्यक्रम के परिप्रेच्य में आधुनिकता की पृष्ठभूमि में भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के पश्चात् के काव्य का अवगाहन करते हुए इस काल के प्रतिनिधि साहित्यकार एवं उनकी रचनाओं से अवगत होना होगा। 2. वर्तमान समय मे दैनिक जीवन के साथ-साथ सरकारी और ग़ैर सरकारी कार्यालयों में प्रयोग होने वाली हिन्दी के विषय में जानकारी इस पाठ्यक्रम के द्वारा प्राप्त करेंगे।

कार्यक्रम प्रभाव

1. छात्र-छात्राएँ उक्त पाठ्यक्र के माध्यम से समकालीन/वर्तमान चुनौतियों, मुद्दों तथा समस्याओं से अवगत होंगे। साथ ही देश की ज्वलंत समस्याआें-भाषावाद, छुआछूत, नशा, जातिवाद, अशिक्षा, बेरोज़गारी, क्षेत्रवाद, सांप्रदायिकता, मानव-तस्करी को तार्किक एवं विश्लेषणात्मक दृष्टि से मनन एवं अधिगम करते हुए उन्हें दूर करने का प्रयास करेंगे। 2. हिन्दी भाषा का प्रयोग-बैंक, सरकारी कार्यालयों, पत्राचार के विविध रूपों के साथ-साथ संक्षेपण, टिप्पण इत्यादि का परिज्ञान छात्रों को होगा। साथ ही अन्य भारतीय भाषाओं तथा विदेशी भाषाओं के प्रति समान भावभूमि एवं रचनात्मक स्तर पर लेखन एवं जानने की प्रवृति भी विकसित होगी।

चतुर्थ अध्ययन सत्र

 पाठ्यक्रम- 04

 1. भाषा कम्प्यूटिंग

 2. हिन्दी गद्य साहित्य

पाठ्यक्रम प्रतिफल

1. छात्र-छात्राओं को उक्त पाठ्यक्रम के द्वारा कम्प्यूटर तथा उससे सम्बद्ध जानकारी प्राप्त होगी। वे हिन्दी भाषा में इस यंत्र का प्रयोग कब से, कैसे और किस प्रकार हो रहा है और कैसे इसे दैनिक जीवन में प्रयोग में लाया जाए, इस तथ्य से अवगत होंगे।

2. हिन्दी की विभिन्न वेबसाइट्स, इंटरनेट, राजभाषा आदि के साथ-साथ उन्हें न्यू मीडिया एवं विविध हिन्दी पत्र-पत्रिकाओं की जानकारी प्राप्त होगी।

3. उपन्यास, कहानी तथा निबंध के सैद्धांतिक पक्ष के साथ-साथ ‘त्यागपत्र’, ‘बड़े घर की बेटी’, ‘आकाशद्वीप’ आदि निबंधों का अध्ययन विद्यार्थी यहाँ करेंगे।

 कार्यक्रम प्रभाव

 1. अशिक्षा, ग़्ारीबी, बेरोज़गारी, कुपोषण, भाग्यवादी एवं अकर्मण्य विचार-दृष्टि को नकारना तथा उनके प्रति जागरण पैदा करने के भाव प्रस्तुत पाठ्यक्रम के अवगाहन से उत्पन्न होगा।

2. महिला शिक्षा, स्वतंत्रता, समानता, दलित, आदिवासी विमर्श से विद्यार्थी अवगत होंगे।

3. पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता का भाव प्रस्फुटित होगा।

4. हिन्दी साहित्य के परिदृश्य से अवगत होने के साथ-साथ अन्य भाषा-साहित्य को जानने एवं अन्य भारतीय भाषाओं के अन्तर्संबंधों को जानने की प्रवृत्ति विकसित होगी।

पंचम् अध्ययन सत्र

पाठ्यक्रम -05

 1. लोक-साहित्य/हिन्दी की सांस्कृतिक पत्रकारिता/छायावादोत्तर हिन्दी कविता

2. भाषा-शिक्षण

3. साहित्य-विवेचन

पाठ्यक्रम प्रतिफल

 1. इस सत्र में छात्र-छात्राएँ लोक साहित्य अथवा हिन्दी की सांस्कृतिक पत्रकारिता अथवा छायावादोत्तर हिन्दी कविता का अवगाहन करते हुए किसी एक प्रश्न पत्र का अध्ययन करेंगे तथा उससे पाठ्यक्रम विशेष के विविध पक्षों से अवगत होंगे। 2. गांधीवादी विचारधारा, राष्ट्रीय आंदोलन एवं भारतीय दर्शन से भी छात्र अवगत हांगे।

 कार्यक्रम प्रभाव

1. तार्किक एवं विश्लेषणात्मक प्रवृत्ति का विकास होगा। साथ ही छात्रों की आलोचनात्मक शैली विकसित होगी।

 2. भाषा एवं विषय ज्ञान को बढ़ाने के लिए छात्रों में पत्र-पत्रिकाओं के अध्ययन की प्रवृत्ति को बल मिलेगा।

3. अपने पर्यावरण, संस्कृति, विरासत, प्राचीन भाषाओं, इतिहास, काव्यशास्त्र, भूगोल, वास्तुकला, चित्रकला, नृत्य एवं संगीत कला, जनसंचार, प्रिंट मीडिया आदि से छात्र अवगत होंगे।

 छठा अध्ययन सत्र

पाठ्यक्रम -06

1. आधुनिक भारतीय साहित्य

 2. सृजनात्मक लेखन के विविध आयाम

 3. अनुवाद विज्ञान/प्रयोजनमूलक हिन्दी

4. रेखाचित्र एवं संस्मरण

पाठ्यक्रम प्रतिफल

1. प्रस्तुत पाठ्यक्रम के अध्ययनोपरांत छात्र-छात्राएँ भारतीय साहित्य के स्वरूप से परिचित होंगे।

 2. साक्षात्कार, फीचर लेखन, कविता, नाटक, संस्मरण इत्यादि विधाओं के लेखन एवं अध्ययन के प्रति छात्रों की सृजनात्मक प्रवृत्ति विकसित होगी।

3. अनुवाद तथा विविध सरकारी एवं गैर सरकारी मानक हिन्दी के प्रयोगों से भी छात्र अवगत होंगे।

4. प्रतिनिधि रेखाचित्र एवं संस्करण लेखकों की प्रतिनिधि कृतियों से छात्र-छात्राएँ अवगत होंगी।

कार्यक्रम प्रभाव

1. लोकतांत्रिक मूल्यों, समाजवादी विचारधारा, गांधीवादी मूल्यों, गणतंत्र, स्वतंत्रता, जिओ और जीने दो की भावना, मानवतावादी विचारधारा को छात्र ग्रहण करेंगे तथा देश के निर्माण में महती भूमिका प्रदान करेंगे।

2. हाशिए के समाज-स्त्री, वनजीवी, दलित तथा पिछड़े लोगों के विषय में सहानुभूति एवं संवेदनशीलता जागृत करते हुए उनके हितों के लिए अग्रसर होंगे।

3. प्रस्तुत पाठ्यक्रम के अध्ययन के उपरांत छात्र-छात्राओं में भाषा-संबंधी ध्वनियों के अशुद्ध उच्चारण का ज्ञान प्रश्नवाचक, आश्चर्यबोधक, अल्पविराम, पूर्ण विराम आदि चिह्नों के अनुसार वाचन का परिज्ञान होगा।

4. छात्रों के शब्द भंडार में वृद्धि होगी।

5. छात्र पुस्तकों एवं पाठों के विषय को ठीक प्रकार से समझन के लिए पाठ-विश्लेषण की प्रवृत्ति विकसित करेंगे तथा अन्यान्य स्रोतों से जानकारी प्राप्त करने का प्रयत्न करेंगे। भाषा एवं विषय ज्ञान को समृद्ध करने के लिए पत्र-पत्रिकाओं को पढ़ेंगे।

             स्ांक्षेप में वृहत्तर स्तर पर छात्रों की मानसिक एवं बौद्धिक शक्ति विकसित होगी तथा राष्ट्र-निर्माण में वे महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करेंगे। प्रस्तुत पाठ्यक्रम में जेंडर, दलित, स्त्री, वनवासी, पर्यावरण तथा पिछड़ा आदि वर्गों को भी सम्मिलित किया गया है। इन सभी के प्रति संतुलित दृष्टिकोण को विकसित करना भी प्रस्तुत पाठ्यक्रम के अन्यान्य लक्ष्य है।

 

 

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